Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
संकà¥à¤°à¤®à¤£ कारण
संकà¥à¤°à¤®à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ है?
अधिकांश बीमारी का मूल कारण किसी à¤à¥€ तरह संकà¥à¤°à¤®à¤£ से संबंधित होता है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ का निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ पहलू शरीर के à¤à¥€à¤¤à¤° à¤à¤• अवांछित जीव के पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ की बात करता है जो अंत में मानव शरीर को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाता है। ये जीव मूल रूप से परजीवी होते हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जीवित रहने के लिठà¤à¤• अलग शरीर की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। मानव शरीर पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ करने, बनाठरखने और यहां तक कि उपनिवेश बनाने के लिठउनका आवास बन जाता है। इन हानिकारक जीवों को रोगजनक कहा जाता है। ये अतà¥à¤¯à¤‚त कà¥à¤¶à¤², अपनाने में तेज और संखà¥à¤¯à¤¾ में गà¥à¤£à¤¾ करने वाले होते हैं। फंगस, वायरस, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¨ मिलकर अनगिनत पà¥à¤°à¤•ार के संकà¥à¤°à¤®à¤£ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करते हैं। जहां कà¥à¤› संकà¥à¤°à¤®à¤£ हलà¥à¤•े होते हैं और जीवन के लिठà¤à¤¸à¤¾ कोई खतरा पैदा नहीं करते हैं, वहीं कà¥à¤› संकà¥à¤°à¤®à¤£ गंà¤à¥€à¤° हो जाते हैं और अकà¥à¤¸à¤° उपचार में ततà¥à¤•ालता के साथ जीवन के लिठखतरा बन जाते हैं।
मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से चार पà¥à¤°à¤•ार के संकà¥à¤°à¤®à¤£ होते हैं जो आम तौर पर मानव को सबसे अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करते हैं। वायरस के कारण होने वाला वायरस संकà¥à¤°à¤®à¤£ सबसे आम संकà¥à¤°à¤®à¤£ है और 50,000 से अधिक वायरस संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ की खोज की जा चà¥à¤•ी है। वायरस à¤à¤• शरीर में आकà¥à¤°à¤®à¤£ करता है और जलà¥à¤¦à¥€ से à¤à¤• कोशिका में सà¥à¤¥à¤¿à¤° हो जाता है। नहीं, जलà¥à¤¦ ही वे कोशिका में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करते हैं, आनà¥à¤µà¤‚शिक सामगà¥à¤°à¥€ की रिहाई उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हजारों में गà¥à¤£à¤¾ करने में सकà¥à¤·à¤® बनाती है। वायरस की तरह à¤à¤šà¤ªà¥€à¤µà¥€ और ईबीवी सेल को जबरदसà¥à¤¤à¥€ à¤à¤• अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ संखà¥à¤¯à¤¾ में दोहराते हैं जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प कैंसर का जनà¥à¤® होता है। दूसरी ओर, कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ वायरस संकà¥à¤°à¤®à¤£ सामानà¥à¤¯ सरà¥à¤¦à¥€, à¤à¤¨à¥à¤¸à¥‡à¤«à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸, मेनिनà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸, गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤‚टेराइटिस, इनà¥à¤«à¥à¤²à¥‚à¤à¤‚जा, à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€, डेंगू बà¥à¤–ार और बहà¥à¤¤ कà¥à¤› हैं।
पà¥à¤°à¥‹à¤•ैरियोटà¥à¤¸ के रूप में जाना जाने वाला जीवाणॠसूकà¥à¤·à¥à¤®à¤œà¥€à¤µ अपने सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर कबà¥à¤œà¤¾ कर लेता है और पृथà¥à¤µà¥€ के पूरे बायोमास में अपनी उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ कर लेता है। अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• गरà¥à¤®à¥€, ठंड और रेडियोà¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ कचरे के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¥€ होने के कारण बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ हैजा, निमोनिया, डिपà¥à¤¥à¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, तà¥à¤µà¤šà¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£, टाइफाइड, टीबी और बहà¥à¤¤ कà¥à¤› जैसी बीमारियों का कारण बना रहता है।
51 मिलियन से अधिक पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में कवक की à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾ के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प मानव शरीर में तà¥à¤µà¤šà¤¾ और आंखों के संकà¥à¤°à¤®à¤£, दाद, वैली फीवर और à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ फà¥à¤Ÿ जैसे कई संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ की वृदà¥à¤§à¤¿ होती है।
पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¨ संकà¥à¤°à¤®à¤£ आमतौर पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नà¥à¤•सान नहीं पहà¥à¤‚चाता है, लेकिन अगर असामानà¥à¤¯ आकार में वृदà¥à¤§à¤¿ होती है तो अंततः मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के संवेदनशील हिसà¥à¤¸à¥‡ को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाता है और साथ ही नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® को गंà¤à¥€à¤° रूप से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है।
| --------------------------- | --------------------------- |